जमशेदपुर : बर्मामाइंस स्थित सुनसुनिया गेट से साकची की ओर बढ़ते ही सड़क की तस्वीर व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती नजर आती है। गेट से आगे करीब 200 मीटर के दायरे में बड़े वाहनों की कतार और जमावड़ा राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर यह स्थिति कोई नई नहीं बताई जा रही, बल्कि लंबे समय से भारी वाहनों के खड़े रहने की बात सामने आती रही है. टाटा स्टील और आसपास के औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़े ट्रक और ट्रेलर दिन-रात सड़क किनारे खड़े दिखाई देते हैं। कई जगह भारी वाहन सड़क के एक हिस्से तक फैल जाते हैं, जिससे गुजरने वाले छोटे वाहनों और दोपहिया चालकों के लिए सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो जाती है।

आधी सड़क भारी वाहनों के हवाले!…..
सुनसुनिया गेट के आसपास स्थिति खास तौर पर तब चुनौतीपूर्ण हो जाती है, जब एक साथ कई भारी वाहन सड़क के किनारे खड़े मिलते हैं। वाहन चालकों को निकलने के लिए सीमित जगह मिलती है और आम राहगीरों को भी इन वाहनों के बीच से रास्ता बनाना पड़ता है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस, दमकल या पुलिस वाहन को तत्काल इसी रास्ते से गुजरना पड़े तो क्या पर्याप्त रास्ता उपलब्ध रहेगा?
अंधेरा होते ही बढ़ जाता है खतरा…….
औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां धूल, धुआं और भारी वाहनों की आवाजाही पहले से ही चुनौती बनी रहती है। इसके साथ यदि सड़क पर पर्याप्त रोशनी न हो और भारी वाहन सड़क के किनारे बेतरतीब ढंग से खड़े हों, तो दुर्घटना की आशंका और बढ़ सकती है. रात के समय ट्रकों और ट्रेलरों के बीच से गुजरना दोपहिया चालकों और पैदल राहगीरों के लिए विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है। सड़क पर खड़ा एक भारी वाहन किसी छोटे वाहन चालक के लिए अचानक सामने आया अवरोध बन सकता है।
रूटीन बन चुकी स्थिति पर किसकी नजर?…….
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है, तो क्या संबंधित विभागों की नजर इस पर नहीं है?
क्या भारी वाहनों के लिए कोई निर्धारित पार्किंग अथवा होल्डिंग व्यवस्था है?
क्या सड़क किनारे वाहनों के खड़े होने की अनुमति है?
क्या नियमित ट्रैफिक निगरानी होती है?
और यदि होती है, तो फिर सड़क पर यह जमावड़ा आखिर क्यों नजर आता है?
हादसे के बाद जागेगा सिस्टम?…….
सड़क पर खड़े भारी वाहनों को देखकर स्थानीय लोगों और राहगीरों के मन में स्वाभाविक रूप से सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है। सवाल किसी एक ट्रक या ट्रेलर का नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का है. जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण करे, भारी वाहनों की पार्किंग व्यवस्था को स्पष्ट करे और सड़क पर अनियंत्रित जमावड़े की स्थिति पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे. क्योंकि सड़क पर खतरा खड़ा हो और व्यवस्था उसे रोज देखती रहे, तो सवाल सिर्फ हादसे का नहीं होता सवाल यह भी होता है कि हादसा होने से पहले जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
सुनसुनिया गेट से साकची जाने वाली इस सड़क पर अब कार्रवाई की जरूरत है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?