झारखंड में प्रतिबंधित गुटखा-पान मसाला का प्रचार धड़ल्ले से जारी, आखिर किसकी मेहरबानी? कानून सिर्फ कागजों पर या कार्रवाई भी होगी?
लोकतंत्र सवेरा : झारखंड सरकार ने जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और तंबाकू-निकोटीन के दुष्प्रभावों पर रोक लगाने के उद्देश्य से तंबाकू एवं निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला के निर्माण, भंडारण, बिक्री और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना और जेल तक की कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन सवाल यह है कि जब प्रतिबंध है, तो फिर प्रतिबंधित उत्पादों का प्रचार-प्रसार किसके दम पर और किसकी शह पर हो रहा है?
कानून बना, आदेश जारी हुआ, प्रतिबंध लगा… लेकिन पालन कराने की जिम्मेदारी किसकी है? अगर प्रतिबंधित उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर रोक नहीं लग पा रही है, तो जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है। आखिर नियमों का पालन कराने वाले तंत्र की नजर इस गतिविधि पर क्यों नहीं पड़ रही है? क्या कानून का डर केवल आम लोगों के लिए है, या फिर प्रचार-प्रसार करने वालों पर भी इसकी आंच पहुंचेगी?
### प्रतिबंध कागजों पर, प्रचार मैदान में!…….
एक तरफ सरकार जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रतिबंध लगाती है, वहीं दूसरी तरफ यदि उन्हीं उत्पादों का प्रचार-प्रसार खुलेआम होता रहे, तो सरकारी आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। तंबाकू और निकोटीन के सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के बीच ऐसे उत्पादों को बढ़ावा देना सामाजिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़ा करता है।
### आखिर किसकी मेहरबानी? कार्रवाई कब होगी?……..
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रतिबंधित उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर निगरानी रखने वाले अधिकारी क्या कर रहे हैं? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी है? यदि जानकारी है, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई? और यदि जानकारी नहीं है, तो निगरानी व्यवस्था किस काम की है? यह मामला किसी एक उत्पाद या कारोबार तक सीमित नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों के पालन और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा से जुड़ा है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग मामले की जांच करें, नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करें और जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करें।
### जनता पूछ रही है, जवाब कौन देगा?…….
सरकार का प्रतिबंध तभी प्रभावी माना जाएगा, जब उसका पालन जमीन पर दिखाई देगा। केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका निष्पक्ष और सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
अब सवाल सीधा है—नियम की जय होगी या नियम तोड़ने वालों की? जनस्वास्थ्य की रक्षा होगी या प्रचार-प्रसार का कारोबार यूं ही चलता रहेगा? आखिर कानून का राज कब दिखाई देगा?
नोट : प्रतिबंधित उत्पादों के प्रचार-प्रसार और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि तथा जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई और जवाबदेही तय की जानी चाहिए।


