नीमडीह में आगजनी व मारपीट का आरोप : प्राथमिकी के एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं, पीड़ित ने उठाए सवाल
सरायकेला-खरसावां। चांडिल। दीनबंधु पांडा : नीमडीह थाना क्षेत्र के ग्राम आण्डा, पो० मुरु निवासी असित पाण्डा (उम्र करीब 33 वर्ष), पिता स्व. सुबोध पाण्डा ने गांव के कुछ लोगों पर मारपीट, धमकी और आगजनी का गंभीर आरोप लगाया है। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के एक माह बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित परिवार में नाराजगी है।

थाना प्रभारी, नीमडीह को दिए गए लिखित आवेदन में असित पाण्डा ने बताया है कि 01 जनवरी 2026 की रात गांव में रास्ता विवाद को लेकर उनके और गांव के ही गुरुचरण महतो (पिता– गन्धेश्वर महतो), विजय महतो (पिता– स्व. केताब महतो), शुकुमार महतो (पिता– स्व. कालीचरण महतो), सुकुमार महतो (पिता– स्व. कालीचरण महतो), अधिवास महतो (पिता– रोहिन महतो) तथा देवा शिष महतो (पिता– सुसेन महतो) के साथ कहासुनी और झगड़ा हुआ था।
आरोप है कि इसी दौरान गुरुचरण महतो और विजय महतो ने उनका मकान जला देने की धमकी दी थी। इसके बाद 02 जनवरी 2026 की रात करीब 12:50 बजे जब वे जागे तो देखा कि उनके मकान के बगल में स्थित पुआल और मिट्टी से बने कमरे में आग लगी हुई है।
घटना में उनके पिता द्वारा खरीदी गई हीरो होंडा सीडी डिलक्स मोटरसाइकिल (संख्या JH05 AP0338), एक हरक्यूलिस साइकिल तथा लगभग दो क्विंटल सालभर के उपयोग योग्य धान जलकर नष्ट हो गया। असित पाण्डा ने बताया कि परिवार के अन्य सदस्यों को जगाकर किसी तरह आग पर काबू पाया गया। उन्होंने आवेदन में स्पष्ट रूप से संदेह व्यक्त किया है कि गुरुचरण महतो और विजय महतो द्वारा ही उनके मकान में आग लगाई गई है।
पीड़ित का कहना है कि घटना के संबंध में थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी आरोपियों के विरुद्ध कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब वे मामले की जानकारी लेने थाना जाते हैं तो कुछ पुलिस कर्मियों द्वारा उल्टा उन पर ही संदेह जताया जाता है और यह कहकर डांट-फटकार दी जाती है कि “आग आपने खुद लगाई होगी।”
इधर, विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना न्याय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है। उन्होंने कहा, “क्या विस्थापित और गरीब परिवारों को इसी तरह न्याय के लिए भटकना पड़ेगा? आखिर उन्हें न्याय कब मिलेगा?”
राकेश रंजन महतो ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी जाति या वर्ग को देखकर आवाज नहीं उठाते। “जो भी पीड़ित है, उसके हक की लड़ाई मैं लड़ता हूं और आगे भी लड़ता रहूंगा। जरूरत पड़ी तो विधायक तक जाएंगे, और यदि तब भी न्याय नहीं मिला तो गरीब परिवार के समर्थन में वृहद स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा,” उन्होंने कहा।
समाचार लिखे जाने तक नीमडीह थाना की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर आरोप की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को कब तक न्याय दिलाता है।
