चाईबासा : कभी भाकपा माओवादी संगठन का सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले सारंडा जंगल से नक्सलवाद के खात्मे की बड़ी खबर सामने आ रही है। झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के लगातार संयुक्त अभियान के बीच एक करोड़ रुपये का इनामी कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ सागर अपने पूरे दस्ते के साथ जल्द आत्मसमर्पण कर सकता है। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, जंगल में माओवादियों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है और संगठन अब पूरी तरह दबाव में है।



जानकारी के मुताबिक पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने बीते कई महीनों से व्यापक ऑपरेशन चला रखा है। लगातार कॉम्बिंग अभियान, सर्च ऑपरेशन और रणनीतिक घेराबंदी के कारण नक्सलियों के लिए जंगल में टिके रहना मुश्किल हो गया है। सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के कथित कॉरिडोर और सप्लाई लाइन पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जिससे संगठन तक रसद और जरूरी सामग्री पहुंचना लगभग बंद हो चुका है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति और लगातार बढ़ते दबाव के कारण कई हार्डकोर नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने की तैयारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि मिसिर बेसरा के साथ उसके दस्ते के कई सक्रिय सदस्य भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं।
मिसिर बेसरा लंबे समय से सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। उस पर कई राज्यों में हिंसक घटनाओं, सुरक्षाबलों पर हमले और बड़े नक्सली नेटवर्क संचालित करने के आरोप हैं। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी थीं।
यदि मिसिर बेसरा अपने दस्ते के साथ आत्मसमर्पण करता है, तो इसे झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी माना जाएगा। माना जा रहा है कि सारंडा में माओवादियों के कमजोर पड़ने के बाद झारखंड में नक्सलवाद का अंतिम अध्याय भी जल्द समाप्त हो सकता है।
