बेरमो (बोकारो)। झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो अनुमंडल अंतर्गत कथारा कोलियरी में गुरुवार की सुबह एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। कथारा कोलियरी के नंबर-5 स्टॉकयार्ड में अचानक कोयले का विशाल ढेर धंस गया। इसकी चपेट में आकर जलावन के लिए रिजेक्ट कोयला चुन रहीं छह महिलाएं और एक पुरुष मलबे के नीचे दब गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में सभी को बाहर निकालकर सीसीएल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां तीन महिलाओं की मौत की सूचना है।
सुबह 4:45 बजे काल बनकर टूटा कोयले का ढेर…..
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 4:45 बजे कथारा कोलियरी के नंबर-5 स्टॉकयार्ड में कुछ स्थानीय ग्रामीण जलावन के लिए रिजेक्ट कोयला चुन रहे थे। इसी दौरान अचानक कोयले का भारी-भरकम ढेर भरभराकर धंस गया। देखते ही देखते वहां मौजूद लोग कोयले के नीचे दब गए। अचानक हुए इस हादसे में किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और कड़ी मशक्कत के बाद दबे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
तीन महिलाओं की मौत से पसरा मातम……
इस दर्दनाक हादसे में तीन महिलाओं की मौत की सूचना है। मृतकों में कौशल्या देवी और पुष्पा देवी की पहचान हुई है, जबकि तीसरी महिला की पहचान फिलहाल नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि तीनों मृत महिलाएं बांध बस्ती की रहने वाली थीं। एक ही हादसे में तीन महिलाओं की मौत की खबर से उनके परिवारों में कोहराम मच गया है। पूरे इलाके में शोक का माहौल है। वहीं, हादसे में घायल अन्य लोगों की स्थिति को लेकर भी स्थानीय लोगों की चिंता बनी हुई है।
पुलिस और सीसीएल प्रबंधन ने संभाला मोर्चा……
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सीसीएल प्रबंधन के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। बेरमो एसडीपीओ रवींद्र सिंह ने भी हादसे की पुष्टि की है। पुलिस और प्रबंधन की ओर से मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल, आखिर किसकी जिम्मेदारी?…….
कथारा कोलियरी के स्टॉकयार्ड में हुए इस हादसे ने सीसीएल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर स्थानीय ग्रामीणों को कोयले के इतने विशाल ढेर के पास जाकर रिजेक्ट कोयला चुनने की नौबत क्यों आई? क्या स्टॉकयार्ड में आम लोगों के प्रवेश पर रोक और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे? यदि थे, तो ग्रामीण वहां तक कैसे पहुंचे? क्या कोयले के ढेर की स्थिरता और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच की जा रही थी?
ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना बेहद जरूरी है। कोयला चुनने के दौरान हुआ यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना भर नहीं, बल्कि खदान और स्टॉकयार्ड क्षेत्रों में काम करने वाले तथा आसपास रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है. फिलहाल तीन महिलाओं की मौत से बांध बस्ती समेत पूरे कथारा क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। अब सबकी निगाहें जांच और सीसीएल प्रबंधन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही इस दर्दनाक घटना की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।




