जमशेदपुर : टाटा स्टील के न्यू सीरीज (एनएस) ग्रेड के कर्मचारियों के बीच वेतन संरचना को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। करीब 7,000 कर्मचारियों ने वर्ष 2019 के वेतन समझौते पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसके कारण उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने आगामी वेतन समझौते में वर्ष 2012 के वेतन मॉडल को आधार बनाने की मांग की है।



कर्मचारी प्रतिनिधियों के अनुसार वर्ष 2019 में हुए वेतन समझौते के दौरान मिनिमम गारंटीड बेनिफिट (एमजीबी) को वेतन संरचना का हिस्सा नहीं बनाया गया। उनका कहना है कि यदि एमजीबी को पे-स्केल में शामिल किया जाता तो कर्मचारियों का मूल वेतन अधिक होता और उसका लाभ वार्षिक वेतन वृद्धि, भविष्य निधि (पीएफ) तथा अन्य वित्तीय सुविधाओं में भी मिलता। कर्मचारियों का दावा है कि इस निर्णय का प्रभाव आज भी हजारों कर्मचारियों की आय पर पड़ रहा है।
प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत एनएस-1 ग्रेड के कर्मचारियों को वार्षिक वेतन वृद्धि में लगभग 100 रुपये तथा एनएस-12 ग्रेड के कर्मचारियों को करीब 210 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। वहीं मूल वेतन में भी 770 रुपये से 1,470 रुपये तक का अंतर देखा जा रहा है। कर्मचारियों के अनुसार यह अंतर समय के साथ बढ़ता जा रहा है और दीर्घकाल में बड़ी आर्थिक क्षति का कारण बन रहा है।
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि पिछले सात वर्षों के दौरान प्रति कर्मचारी औसतन 8,330 रुपये तक का प्रत्यक्ष नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि यह केवल वेतन का मामला नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है।
कर्मचारियों ने महंगाई भत्ता (डीए) और फिक्स्ड डीए (एफडीए) में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नई नियुक्तियों के लिए डीए को शून्य कर दिया गया, जबकि एफडीए को 800 रुपये से घटाकर 500 रुपये कर दिया गया। इससे नए कर्मचारियों की शुरुआती आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने उदाहरण देते हुए बताया कि अगस्त 2024 में एनएस-7 ग्रेड पर नियुक्त कर्मचारी को पुरानी व्यवस्था के तहत मूल वेतन, एफडीए और डीए मिलाकर लगभग 38,870 रुपये प्राप्त होते, जबकि वर्तमान व्यवस्था में उसे 23,995 रुपये ही मिल रहे हैं। उनका दावा है कि इससे प्रतिमाह लगभग 14,875 रुपये का अंतर उत्पन्न हो रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा खर्च और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच वेतन विसंगति उनके लिए चिंता का विषय बन गई है। कई कर्मचारियों ने यह भी कहा कि वे पहले से ही पीएफ, सहकारी समितियों और अन्य ऋणों के बोझ से दबे हुए हैं।
एनएस ग्रेड कर्मचारियों की कमेटी ने मांग की है कि आगामी वेतन समझौते में वर्ष 2012 के वेतन मॉडल को आधार बनाया जाए, ताकि कर्मचारियों के बीच मौजूद वेतन असमानता को दूर किया जा सके और भविष्य में होने वाले आर्थिक नुकसान को रोका जा सके. फिलहाल इस मुद्दे पर कर्मचारियों की मांगों को लेकर टाटा स्टील प्रबंधन और यूनियन के रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



