सौरभ कुमार | जादूगोड़ा
जादूगोड़ा स्थित Uranium Corporation of India Limited अस्पताल इन दिनों भारी दवा संकट से जूझ रहा है। अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही का खामियाजा गरीब मरीजों, ग्रामीणों और रिटायर्ड कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। हालत यह है कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई जरूरी दवाएं 10 दिनों बाद भी मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जिससे अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया है।



मरीजों का आरोप है कि 5 तारीख को लिखी गई दवाएं 14 तारीख गुजर जाने के बाद भी अस्पताल स्टोर तक नहीं पहुंची हैं। रोजाना दूर-दराज गांवों से आने वाले मरीज और बुजुर्ग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन जब उनकी बारी आती है तो उन्हें सिर्फ एक ही जवाब मिलता है—“दवा खत्म है।”
बुजुर्गों और गंभीर मरीजों की बढ़ी परेशानी……
दवा संकट का सबसे ज्यादा असर उन बुजुर्गों और रिटायर्ड कर्मचारियों पर पड़ रहा है, जो पूरी तरह अस्पताल की मुफ्त दवा व्यवस्था पर निर्भर हैं। कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर दवा नहीं मिलने से उनकी हालत बिगड़ने लगी है। परिजनों का कहना है कि लगातार चक्कर लगाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल रहा।
एक नाराज मरीज ने कहा….. “सुबह से लाइन में लगते हैं, लेकिन खिड़की पर पहुंचते ही कह दिया जाता है कि दवा नहीं है। आखिर मरीज जाए तो जाए कहां?”
प्रबंधन पर उठ रहे सवाल……
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के दावों के बावजूद अस्पताल में जरूरी दवाओं का अभाव बेहद शर्मनाक है। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी कंपनी के अस्पताल में दवा आपूर्ति व्यवस्था क्यों चरमरा गई है?
सबसे हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामले पर अब तक अस्पताल प्रबंधन या जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे मरीजों और उनके परिजनों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
मरीज बोले — “वादे बड़े, लेकिन दवा एक गोली भी नहीं”…..
अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे लोगों का कहना है कि सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि मरीज एक-एक गोली के लिए परेशान हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने जल्द दवा आपूर्ति बहाल करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।



