एनएसयू में क्विज, भाषण, कविता पाठ और पोस्टर प्रतियोगिताओं के जरिए गांधीवादी विचारों व भारतीय ज्ञान प्रणाली की समकालीन प्रासंगिकता पर हुई चर्चा
जमशेदपुर : नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय, जमशेदपुर में गांधी जयंती एवं लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर राजनीति विज्ञान एवं इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम “महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री और भारतीय ज्ञान प्रणाली : समकालीन भारत के लिए प्रासंगिकता” रही। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को गांधीवादी चिंतन, शास्त्री जी के आदर्शों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों से परिचित कराते हुए उन्हें वर्तमान सामाजिक एवं राष्ट्रीय संदर्भों से जोड़ना था।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में टाटा वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष डॉ. शाहनवाज आलम तथा गांधीवादी दर्शन के प्रणेता डॉ. सुखचंद झा उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संकायों से करीब 180 विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया. आयोजन के दौरान ‘विज्युलाइजिंग गांधी थ्रू इंडियन नॉलेज सिस्टम्स’ विषय पर आधारित क्विज प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, कविता पाठ और पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने सत्य, अहिंसा, स्वावलंबन, ग्राम स्वराज और सामाजिक समरसता जैसे गांधीवादी विचारों को भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में प्रस्तुत किया।
गांधी और जमशेदपुर का रहा है गहरा संबंध : डॉ. शाहनवाज…….
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. शाहनवाज आलम ने कहा कि जमशेदपुर शहर और यहां के कामगार वर्ग से महात्मा गांधी का गहरा संबंध रहा है। उन्होंने बताया कि 1925 में टाटा प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच उत्पन्न विवादों के समाधान के लिए महात्मा गांधी जमशेदपुर आए थे। गांधीजी के प्रयासों का ही परिणाम रहा कि टाटा प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच संवाद एवं सामंजस्य की परंपरा मजबूत हुई और दोनों पक्ष शहर के विकास में योगदान देते रहे।
युवा गांधी और शास्त्री को पढ़ें : डॉ. सुखचंद झा…….
विद्यार्थी संवाद सत्र में डॉ. सुखचंद झा ने कहा कि जमशेदपुर से गांधीजी का रिश्ता बेहद गहरा रहा है। गांधीजी विभिन्न अवसरों पर जमशेदपुर आए और उनकी यात्राओं एवं गतिविधियों को उन्होंने अपनी पुस्तक ‘झारखंड में महात्मा गांधी’ में क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। उन्होंने युवा पीढ़ी से महात्मा गांधी के विचारों को पढ़ने तथा प्रधानमंत्री के रूप में लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल और उनके योगदान को समझने का आह्वान किया।
प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह…….
भाषण प्रतियोगिता के प्रथम सत्र में बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा नाजनीन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि बीए राजनीति विज्ञान के आदित्य राज उपविजेता रहे। दूसरे सत्र में सौम्य दुर्गा गुप्ता प्रथम, अनन्या दुबे द्वितीय तथा अदीना फातिमा और नंदिनी कुमारी संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहीं।
पोस्टर प्रतियोगिता में बी.फार्मा की आलिया समर विजेता तथा बीए अंग्रेजी की पलक कंचन उपविजेता रहीं। कविता पाठ प्रतियोगिता में शादान नाजनीन ने प्रथम, दामिनी रॉय ने द्वितीय तथा प्रज्ञा पांडेय और आयशा तब्सुम ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया।
क्विज प्रतियोगिता में राजनीति विज्ञान विभाग की टीम आदित्य, अंचित्या, आयुष और पायल ने प्रथम स्थान हासिल किया। मयूरिका नंदी, आस्था कुमारी और विशाल मंडल की टीम उपविजेता रही. प्रतियोगिताओं के निर्णायक के रूप में प्रो. डॉ. एस.आर. खान, डॉ. पूनम, डॉ. प्रियंका कुजूर और असिस्टेंट प्रो. दीपिका कुमारी ने विद्यार्थियों के प्रस्तुतिकरण का मूल्यांकन किया। विजेताओं एवं उपविजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।
गांधी-शास्त्री के विचार आज भी प्रासंगिक : मदन मोहन सिंह…….
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का जीवन भारतीय मूल्यों, सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल प्राचीन ज्ञान का अध्ययन नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने वाली समृद्ध परंपरा है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। विद्यार्थियों को इन महान विभूतियों के विचारों को अपने आचरण और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।
कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने कहा कि विश्वविद्यालय का दायित्व केवल विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें देश की सांस्कृतिक, नैतिक और बौद्धिक विरासत से परिचित कराना भी है। गांधी और शास्त्री के विचारों को भारतीय ज्ञान प्रणाली के संदर्भ में समझना विद्यार्थियों को समकालीन चुनौतियों के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने में सहायक होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से सत्य, अनुशासन, आत्मनिर्भरता, सेवा और राष्ट्रहित जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में कुलाधिपति मदन मोहन सिंह, कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि, रजिस्ट्रार नागेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोजिब अशरफ, अकादमिक सलाहकार प्रो. दिलीप शोम, निदेशक (आईक्यूएसी) डॉ. गरिमा सिंह, डीन (एडमिनिस्ट्रेशन) डॉ. राकेश कुमार, डीन (एकेडमिक) अभिनव कुमार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे. कार्यक्रम का समापन प्रतियोगिताओं के विजेताओं एवं प्रतिभागियों के सम्मान के साथ हुआ। आयोजन ने विद्यार्थियों को गांधीवादी विचारधारा, लाल बहादुर शास्त्री के जीवन-मूल्यों और भारतीय ज्ञान प्रणाली की समकालीन उपयोगिता पर चिंतन का प्रभावी मंच प्रदान किया।
