घाटशिला : बांग्ला के सुप्रसिद्ध लेखक और उपन्यासकार बिभूतिभूषण बंधोपाध्याय का 131 वी जयंती डॉ सुनीता देबदूत सोरेन के द्वारा मनाया गया. मौके पर घाटशिला की चर्चित समाजसेवी सह भाजपा नेत्री डॉ सुनीता देबदुत सोरेन ने घाटशिला स्थित विभूति बाबू के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की-



मौके पर डॉ सुनीता ने कहा कि विभूति बाबू ने घाटशिला को साहित्य के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ाएं हैं , वे अपने सुप्रसिध्द उपन्यास पाथेर पंचाली के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं, भारत की आधुनिक सांस्कृतिक निर्मिति की विलक्षणता को जानने-समझने के लिए बंगाल की संस्कृति और उससे जुड़े नवजागरण के सरोकारों का अध्ययन बेहद जरूरी है। इस लिहाज से जिन कुछ नामों और उनके रचनात्मक जीवन और कार्यों का उल्लेख काफी होता है, उनमें बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय का नाम अहम है। इस नाम से जुड़ी कृति, यश और लोकप्रियता का आलम यह है कि यूनेस्को तक ने उनकी महत्ता को स्वीकार किया है। वे विदेशी भाषाओं में सर्वाधिक अनूदित होने वाले साहित्यकारों में शुमार हैं।
बिभुति बाबु के साहित्य के अध्येताओं व आलोचकों ने जो एक बात सामान्य तौर पर कही है, वह यह कि उनका लेखन एक तरह से सामान्य जीवन का उत्सव है। ऐसा उत्सव जिसमें दुख-सुख, संघर्ष और संवेदना सब एक साथ मानवीय जीवन गरिमा को रचते हैं। इस गरिमा की चमक और इसे लगने वाली खरोंच को एक साथ लाने की कोशिश में बिभूति बाबू के लेखन ने मनुष्य की संवेदना और सामाजिकता से जुड़े सवालों, सरोकारों और दरकारों की जिस तरह शिनाख्त की, वह अपूर्व है। मौके पर दीपू दत्ता,विनय बेरा,अम्लान कर, कृष्णा पात्र, छोटू पातर, गुरुपदो पातर, कमलजीत करवा, सौरव महाली आदि।
