रांची। रिम्स में गुरुवार की रात करीब 11.30 बजे ड्यूटी के वक्त चाय पीने के बाद 2024 बैच की फर्स्ट ईयर की पीजी छात्रा (जूनियर डॉक्टर) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। स्थिति अत्यधिक खराब होने के बाद उसे सेंट्रल इमरजेंसी में लाया गया, जहां डाक्टरों ने गंभीर हालत देखते हुए उसे रात करीब 12 बजे आइसीयू में भर्ती कराया गया।

घटना के करीब 12 घंटे के बाद छात्रा को होश आया है लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मामला सामने आने के बाद पुलिस केस हुआ है, जिसके बाद बरियातू पुलिस छानबीन में जुट गई है। इधर, रिम्स प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।
कमेटी में मेडिसिन विभाग के एचओडी डाॅ. बी कुमार की अध्यक्षता में टीम जांच करेगी। टीम में एफएमटी टाॅक्सिकोलाजी विभाग के डाॅ. भूपेंद्र सिंह व आब्स गायनी विभाग की इंचार्ज डाॅ. अतिमा भारती शामिल है।
आर्थो विभाग के बगल के कैंटिन से मंगवायी गई थी 10 चाय
रिम्स के चौथे तल्ले में स्थित गायनी विभाग में ड्यूटी कर रहे 10 जूनियर डाॅक्टरों ने रात में ग्राउंड फ्लोर स्थित एक कैंटिन से चाय आर्डर किया था। जिसके बाद कैंटिन की ओर से एक लड़के को थरमस में चाय देकर भेजा गया। बताया जा रहा है कि सभी जूनियर डाॅक्टरों को चाय दी तो उससे बदबू आ रही थी, जिसके बाद किसी ने चाय नहीं पी, लेकिन एक छात्रा ने चाय पी ली। जिसके कुछ देर बाद ही तबीयत खराब होने लगी और उसकी हालत देख उसे इमरजेंसी ले जाया गया।
तीन तरह के आ रहे बयान
- पीजी छात्रों ने बताया कि चाय से बदबू आ रही थी जिसके बाद उन सभी ने चाय नहीं पी, लेकिन पीड़िता ने अकेले चाय पी।
- गायनी विभाग के डाॅ. अर्चना कुमारी ने बताया कि पीड़िता ने अकेले चाय पी और दूसराें से कहा कि वे चाय न पीए, इससे बदबू आ रही है। चाय में टेस्ट नहीं है।
- कैंटिन कर्मी ने बताया कि सभी ने चाय पी लेकिन पीड़िता ने चाय थरमस में ही रखने को कहा और बाद में उसने पीया।
थरमस जब्त कर फोरेंसिक लैब भेजा गया
उक्त चाय की थरमस को पुलिस ने जब्त कर एफएसएल होटवार जांच के लिए भेजा है। थरमस की जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि आखिर उस थरमस में क्या कुछ मिला था। फिलहाल रिपोर्ट आने का इंतजार है जिसके बाद आगे की गुत्थी सुलझ पाएगी।
टॉक्सिकोलाजी विभाग ने लिया जांच के लिए सैंपल
छात्रा के बीमार होने के कारणों को जानने के लिए टाॅक्सिकोलाजी (विष) विभाग की ओर से उसके कई सैंपल लिए गए हैं। इसमें छात्रा के खखार, पेट के गैस्ट्रिक लवाज (पेट से निकाला गया पदार्थ) और ब्लड सैंपल जांच के लिए गए हैं। इसकी जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है। फिलहाल हर पहलुओं को देखते हुए छात्रा का इलाज किया जा रहा है।
प्वाइजनिंग का है मामला : डाॅक्टर
इस मामले को देखने के बाद क्रिटिकल केयर के डाॅ. जयप्रकाश बताते हैं कि यह पूरी तरह से प्वाइजनिंग का मामला है। जो भी लक्षण देखने को मिला है उससे प्वाइजनिंग के ही संकेत है। हालांकि यह जहर किस स्तर का है या खाने-पीने से कभी स्थिति खराब भी हो जाती है, इसकी जांच प्रबंधन की ओर से की जा रही है। फिलहाल छात्रा वेंटिलेटर सपोर्ट पर है और उसकी जान बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है।
कैंटिन सील, तीन हिरासत में
बरियातू पुलिस ने इस घटना के बाद रिम्स स्थित उक्त कैंटिन को सील कर दिया है और तीन कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस के अनुसार सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है और जो भी दोषी होंगे उसके विरूद्ध नियमसंगत कार्रवाई की जाएगी। प्रबंधन की ओर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी को कैंटिन जांच के लिए बुलाया गया, जिसके द्वारा कैंटिन से फूड सैंपल जांच के लिए लिया गया है।
छात्रा ने चाय नहीं पी थी, थरमस में ही रखा था : कैंटिन संचालक
कैंटिन संचालक ने बताया कि जो चाय थरमस में भेजा गया था वो सभी छात्रों ने पिया। लेकिन पीड़ित छात्रा ने चाय नहीं पी और उसे थरमस में ही रखने को कहा। बाद में जब छात्रा ने थरमस से चाय पी तो यह मामला सामने आया है। जबकि शुरू में अन्य सभी ने चाय पी थी लेकिन किसी को कुछ नहीं हुआ। इससे पहले भी उसी थरमस से चाय अन्य डाक्टरों को दी जा चुकी है, जिससे कोई बीमार नहीं पड़ा।
इन तीन बिंदुओं पर उठ रहे सवाल
1. बाहरी-भीतरी का हो सकता है मामला : छात्रा बिहार की रहने वाली है, जिसे लेकर भी यह बात सामने आर ही है बाहरी-भीतरी का मामला हो सकता है। बिहार और झारखंड के छात्रों के बीच हमेशा ही एक विवाद रहा है। जिसमें कई बार हो-हंगामे को लेकर मामला सामने आ चुका है। उनके ही ग्रुप के छात्र-छात्राओं में इस बिंदु को लेकर अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं।
2. रैगिंग का भी मामला हो सकता है : रिम्स में रैगिंग होना कोई नई बात नहीं है। छात्रा पीजी फर्स्ट ईयर की छात्रा है, जिसे लेकर रैगिंग की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। हालांकि अभी तक प्रबंधन ने इसपर कुछ भी कहने से मना कर दिया है। पीड़ित पीजी छात्रा ने रिम्स से ही एमबीबीएस करने के बाद पीजी में एडमिशन लिया था।
3. जहर देने का मामला : कैंटिन संचालक के अनुसार छात्रा ने शुरू में चाय नहीं पी थी। जिसके बाद थरमस में ही चाय रख दिया गया था। जिससे यह आशंका व्यक्त की जा सकती है कि उस थरमस में रखे चाय में किसी ने जहर मिला दिया हो। जबकि उसी थरमस की चाय पीने से अन्य बीमार नहीं पड़े।
गायनी विभाग की पीजी डाॅक्टर की रात ड्यूटी थी, रात को पीजी छात्रा ने चाय पी, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। इस मामले को लेकर जांच कमेटी गठित की गई है। छात्रा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। ट्राॅमा सेंटर हेड डाॅ. प्रदीप भट्टाचार्य की देखरेख में छात्रा का इलाज चल रहा है।
– डाॅ. राजीव रंजन, पीआरओ, रिम्स
