JHARKHAND : केंद्रिय माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से झारखंड सरकार को 16,408.78 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान हुआ है। साल-दर-साल हो रहे राजस्व नुकसान को लेकर वाणिज्य कर विभाग ने एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में पिछले आठ साल (2017-18 से 2024-25) समेत अगले पांच साल (मार्च 2030 तक) के राजस्व नुकसान का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2030 तक झारखंड को 61,676.66 करोड़ रुपए नुकसान होने का अनुमान है।



रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्व नुकसान 8136.05 करोड़ का हो सकता है, जो साल-दर-साल बढ़कर वर्ष 2029-30 तक 17,257.60 करोड़ हो जाएगा। यह नुकसान कुल 61,677 करोड़ होने का अनुमान है। दूसरी ओर, जीएसटी लागू होने से पहले साल (एक जुलाई 2017 से मार्च 2018) तक राजस्व में 297.16 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2024-25 तक राजस्व नुकसान का आंकड़ा प्रति वर्ष बढ़ता गया।
राजस्व नुकसान होने के ये हैं प्रमुख कारण
जीएसटी खपत होने पर लगता है। जब जीएसटी नहीं था, तब उत्पाद पर सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी) एवं अन्य टैक्स लगते थे। झारखंड में स्थित कोई कंपनी माल उत्पादन कर बाहर भेजती थी, तो उस पर दो प्रतिशत सीएसटी लगता था, जो राज्य को मिलता था। वर्तमान में कंपनी कोई भी माल उत्पादन करें तो उस पर टैक्स नहीं मिलेगा। अगर वहीं माल की खपत झारखंड में होगी तो उसपर जीएसटी मिलेगा। यानी राज्य से जो माल बाहर जा रहा है, उस पर दो प्रतिशत टैक्स मिलना भी बंद हो गया।
माल की खपत प्रति व्यक्ति आय पर निर्भर करती है। प्रति व्यक्ति आय की रैंकिंग मामले में झारखंड आज भी देश में 26वें स्थान पर है। यानी झारखंड को जीएसटी से हमेशा नुकसान हुआ है। बिहार की प्रति व्यक्ति आय झारखंड से कम है, बावजूद बिहार को जीएसटी से नुकसान झारखंड की तुलना में कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि बिहार में कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं है।



