पैरा खिलाड़ियों की लड़ाई में डटे जटा शंकर चौधरी और कुमार गौरव, सिस्टम से भिड़कर बदल रहे हैं खेल की तस्वीर, सिस्टम बनाम पैरा खिलाड़ी! जटा शंकर चौधरी और कुमार गौरव बने उम्मीद की आख़िरी किरण
संवाददाता : शिबू कुमार रजक की खास रिपोर्ट/रांची : झारखंड के पैरा खिलाड़ियों के हक़ और सम्मान की जंग अब खुलकर सामने आ चुकी है। पैरालिंपिक कमेटी ऑफ झारखंड के अध्यक्ष जटा शंकर चौधरी और सचिव कुमार कुमार दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं ताकि पैरा खिलाड़ियों को उनका वाजिब अधिकार मिल सके।
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सूत्रों के मुताबिक, चयन प्रक्रिया से लेकर प्रतियोगिताओं में भागीदारी तक कई स्तरों पर पैरा खिलाड़ियों के साथ अन्याय होता रहा है, जिसे उजागर करने और सुधारने की जिम्मेदारी अब पीसीजे के इन दोनों पदाधिकारियों ने अपने कंधों पर उठा ली है। तमाम दबावों और बाधाओं के बावजूद दोनों पदाधिकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
अध्यक्ष जटा शंकर चौधरी और कुमार कुमार का साफ कहना है कि पैरा खिलाड़ी किसी से कम नहीं हैं और यदि उन्हें सही मंच और सुविधाएँ मिलें, तो वे राज्य ही नहीं बल्कि देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उनकी इस लड़ाई से पैरा खिलाड़ियों में नई उम्मीद जगी है और खेल जगत में हलचल तेज हो गई है।
खेल जगत में यह चर्चा तेज हो गई है कि पीसीजे के पदाधिकारी सिर्फ कागज़ी काम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मैदान से लेकर मंत्रालय तक पैरा खिलाड़ियों की आवाज़ बन चुके हैं। तमाम दबावों, आलोचनाओं और चुनौतियों के बावजूद दोनों पदाधिकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिस्टम पैरा खिलाड़ियों की इस आवाज़ को गंभीरता से सुनेगा? या फिर यह संघर्ष और भी बड़ा रूप लेगा?
एक बात तो तय है—झारखंड के पैरा खिलाड़ियों की लड़ाई अब दबने वाली नहीं है, और आने वाले दिनों में इससे जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।