तीन दिनों तक चला रूहानी व धार्मिक आयोजन, उलेमा ने दिया अमन, भाईचारे और शिक्षा का संदेश
झारखंड में क़ादरी अरबी-फ़ारसी यूनिवर्सिटी की मांग, मंत्री हाफिज़ुल हसन बोले— हरसंभव सहयोग दूंगा
जमशेदपुर : धतकीडीह सेंटर मैदान में आयोजित क़ायदे अहले सुन्नत हज़रत अल्लामा अरशदुल क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिवसीय 25वां सालाना उर्स शनिवार को अकीदत, रूहानियत और गरिमामय वातावरण में संपन्न हो गया। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे उलेमा, मशाइख, हाफिज़, छात्र, पूर्व छात्र तथा हजारों अकीदतमंदों ने बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शिरकत की. उर्स के अंतिम दिन असर की नमाज़ के बाद विशेष कुल शरीफ का आयोजन किया गया। इस दौरान कुरआन पाक की तिलावत, दरूदो-सलाम, ज़िक्र और मरहूमीन के लिए दुआएं की गईं। साथ ही देश में अमन, भाईचारा, खुशहाली और पूरी उम्मत की सलामती के लिए सामूहिक दुआ की गई।

रात्रि सत्र में देश के प्रतिष्ठित उलेमा ने ईमान, इश्क़-ए-रसूल, अहले सुन्नत के विचार, उम्मत की एकता तथा दीन-ए-इस्लाम की शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता मदरसा फैज़ुल उलूम जमशेदपुर के सदर एवं मोहतमिम डॉ. गुलाम ज़रकानी ने की. समारोह में झारखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाफिज़ुल हसन, झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान सहित देशभर के अनेक प्रमुख उलेमा मौजूद रहे। इनमें मुफ्ती सलमान रज़ा अज़हरी, शाह मुईनुद्दीन अशरफ अशरफी जिलानी, अल्लामा गुलाम रसूल बलियावी, मुफ्ती सईद नूरी, मुफ्ती फैज़ानुल मुस्तफा, अल्लामा अब्दुल मुबीन नोमानी और अल्लामा बद्र आलम समेत कई धर्मगुरुओं ने अपने विचार रखे।
इस अवसर पर बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अल्लामा गुलाम रसूल बलियावी ने झारखंड में क़ादरी अरबी-फ़ारसी यूनिवर्सिटी की स्थापना की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि दीनी और आधुनिक शिक्षा के समन्वय के लिए ऐसी यूनिवर्सिटी की स्थापना समय की आवश्यकता है, जिससे नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा और मार्गदर्शन मिल सके. मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाफिज़ुल हसन ने कहा कि “इंशाअल्लाह क़ादरी अरबी-फ़ारसी यूनिवर्सिटी हर हाल में बनेगी। इसके लिए मैं तन, मन और धन से हर संभव सहयोग दूंगा। आप सभी इस मुहिम को आगे बढ़ाइए, मैं हर कदम पर आपके साथ हूं।” मंत्री की घोषणा का उपस्थित लोगों ने तालियों और नारों के साथ स्वागत किया। झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने भी इस पहल का समर्थन किया. अपने संबोधन में मुफ्ती सलमान रज़ा अज़हरी ने इश्क़-ए-रसूल, उम्मत की एकता, युवाओं के चरित्र निर्माण, कुरआन और सुन्नत पर अमल तथा बेहतर आचरण की अहमियत पर विशेष जोर दिया। उन्होंने मुसलमानों से आपसी मतभेद भुलाकर इल्म हासिल करने, नमाज़ की पाबंदी करने और इस्लामी शिक्षाओं के अनुरूप जीवन जीने की अपील करते हुए समाज में मोहब्बत, भाईचारा और अमन कायम रखने का संदेश दिया।
उर्स के दौरान मदरसा की ओर से सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को क़ायदे अहले सुन्नत अवॉर्ड, फैज़ी अवॉर्ड एवं सम्मान ट्रॉफी प्रदान की गई। वहीं मदरसा के 400 से अधिक पूर्व छात्रों (एलुमनाई) को उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण विभिन्न दीनी पाठ्यक्रम पूर्ण करने वाले 70 छात्रों की दस्तारबंदी रही। छात्रों को सम्मानपूर्वक पगड़ी पहनाकर दीन की सेवा के लिए दुआओं के साथ विदा किया गया।
उर्स में शामिल होने वाले जायरीन और अकीदतमंदों के ठहरने, भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं का सफल संचालन केंद्रीय उर्स कमेटी और उसकी विभिन्न उपसमितियों ने किया, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की. तीन दिवसीय इस धार्मिक एवं शैक्षणिक आयोजन के सफल समापन के साथ क़ायदे अहले सुन्नत हज़रत अल्लामा अरशदुल क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह के 25वें सालाना उर्स के सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हो गए।
