सरायकेला : बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां प्रखंड अंतर्गत संतारी गांव में जहरीले सांप के डसने से दो मासूम भाई-बहन की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है. मृतकों की पहचान सचिन जोंको के 11 वर्षीय पुत्र शिवा जोंको और 13 वर्षीय पुत्री सीमा जोंको के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे घर में सो रहे थे, इसी दौरान जहरीले सांप ने उन्हें डस लिया।

सुबह करीब पांच बजे सांप ने डसा….
मिली जानकारी के अनुसार, दोनों भाई-बहन घर में सो रहे थे। इसी दौरान सुबह करीब पांच बजे सांप ने दोनों को डस लिया। सांप के डसने के बाद दोनों ने उठकर परिजनों को बताया कि उन्हें किसी चीज ने काटा है। हालांकि, शुरुआत में परिजन यह समझ नहीं सके कि बच्चों को जहरीले सांप ने डसा है. बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी, लेकिन उन्हें तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया जा सका। बताया जा रहा है कि करीब 11 बजे उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। तब तक काफी देर हो चुकी थी। इलाज के दौरान दोनों बच्चों की मौत हो गई।
समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान…..
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा है कि यदि बच्चों को सर्पदंश के तुरंत बाद अस्पताल पहुंचाया जाता और समय पर चिकित्सकीय उपचार मिलता, तो संभवत: उनकी जान बचाई जा सकती थी. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जहरीले सांप के काटने के बाद मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है। चिकित्सकों की निगरानी में आवश्यक उपचार और एंटी-स्नेक वेनम (ASV) दिए जाने से सर्पदंश के कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।
झाड़-फूंक के बजाय अस्पताल पहुंचें……
बरसात के मौसम में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में सर्पदंश होने पर किसी भी तरह के अंधविश्वास, झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। सांप के काटने की आशंका होने पर पीड़ित को शांत रखते हुए बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाना चाहिए. सर्पदंश की स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए अंधविश्वास से बचें, इलाज में देरी न करें और तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचें।



























































