सरायकेला/चांडिल : जिला सरायकेला-खरसावां अंतर्गत ईचागढ़ विधानसभा के ईचागढ़ थाना क्षेत्र के गौरांकोचा ब्लॉक के सामने डायन प्रथा के नाम पर 65 वर्षीय विधवा महिला के साथ हुई अमानवीय मारपीट का मामला एक महीने बाद भी न्याय की राह ताक रहा है। ईचागढ़ थाना क्षेत्र के गौरांग कोचा (ब्लॉक कॉलोनी) में हुई इस घटना को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं झारखंड आंदोलनकारी अवधेश मुर्मू ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता कर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि घटना को एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पीड़ित गरीब महिला बिजल कालिंदी को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
घर में घुसकर मारपीट का आरोप, भय के साये में जी रहा परिवार……
गौरतलब है कि 21 दिसंबर की रात बिजल कालिंदी के साथ उनके घर में घुसकर मारपीट और अपमान किए जाने का आरोप लगा था। पीड़िता का कहना है कि उस समय घर में कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था। उन्होंने हाथ जोड़कर माफी की गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया।
घटना के बाद से पीड़िता और उसका परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है। पीड़िता का कहना है कि उन्हें और उनके बेटे को लगातार धमकियां मिल रही हैं अदीब अंसारी गोली से मारने की धमकी देकर गया है।
धमकी का आरोप, परिवार डरा-सहमा…..
प्रेस वार्ता में अवधेश मुर्मू ने सवाल उठाया कि पीड़िता के पुत्र राजेंद्र कालिंदी को कथित रूप से गोली मारने की धमकी कौन अदीब अंसारी दे रहा है? वहीं पीड़िता बिजल कालिंदी ने भावुक होते हुए बताया कि उनके घर आकर उनके बेटे को गोली मारने की धमकी दे डराया गया कि यदि थाना गए तो अंजाम भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि वह इंसाफ की उम्मीद में दर-दर भटक रही हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
न्याय नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी…..
अवधेश मुर्मू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर पीड़िता को न्याय नहीं मिला, तो वे ईचागढ़ थाना का घेराव करेंगे। जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक ले जाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भी डायन प्रथा जैसी कुप्रथा का बने रहना समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है। इस मामले में यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह सामाजिक न्याय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।
पीड़िता की दर्दभरी अपील……
पीड़िता बिजल कालिंदी ने हाथ जोड़कर कहा— “मैं कहां जाऊं, किससे फरियाद करूं? अगर मुझे इंसाफ नहीं मिला तो मैं राष्ट्रपति से सपरिवार इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगने को मजबूर हो रही हूं।”
उनकी यह अपील न केवल प्रशासन, बल्कि पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है।
न्याय की मांग, समाज की परीक्षा……
अवधेश मुर्मू ने कहा कि यह केवल एक महिला का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता और शासन-प्रशासन की जवाबदेही की परीक्षा है। पीड़िता को सुरक्षा, सम्मान और न्याय मिलना चाहिए—यही संविधान की आत्मा है।
